पांवटा साहिब साहिबजादा अजीत सिंह का प्रकाश उत्सव धूमधाम सेे मनाया,निकाला नगर कीर्तन

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पांवटा साहिब साहिबजादा अजीत सिंह का प्रकाश उत्सव धूमधाम सेे मनाया,निकाला नगर कीर्तन
पांवटा साहिब गुरु की नगरी पांवटा साहिब में श्री गुरु गोविंद सिंह जी के प्रथम पुत्र साहिबजादा अजीत सिंह का प्रकाश उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर श्री भंगाणी साहिब से पांवटा साहिब तक फतह मार्च का आयोजित किया गया। नगर कीर्तन भंगाणी गुरुद्वारे से 20 किलोमीटर का सफर तय करके पांवटा साहिब गुरुद्वारे में पहुचा।

भंगाणी साहिब में दशम पातशाह श्री गुरू गोविंद सिंह जी ने बसंत पंचमी के दिन गोरखा राजा के खिलाफ पहला घर्म युद्ध लडा था। इस यु़द्ध में उन्हें जीत मिली थी और इसी दिन पांवटा साहिब में उनके पहले बेटे साहिबजादा अजीत सिंह का जन्म भी हुआ था।

गुरु गोविन्द सिंह द्वारा प्रथम धर्म युद्ध की जीत व् उनके बड़े पुत्र बाबा अजीत सिंह प्रकाशोत्सव के अवसर पर पांवटा साहिब के भगाणी साहिब से गुरुद्वारा पांवटा साहिब के लिए फतेह मार्च निकाला गया। हजारों की संख्या में संगतों ने इस आयोजन में भाग लिया। सिखों के दशम पिता गुरु गोविन्द सिंह ने अपने जीवन का पहला धर्म युद्ध पांवटा साहिब के भगानी साहिब में लड़ा था।

तत्कालीन महाराजा सिरमौर मधनि प्रकाश के आग्रह पर गुरु गोविन्द सिंह अनंतपुर साहिब से होते हुए पांवटा साहिब पहुंचे थे। इस क्षेत्र पर गोरखा राजा घडवली ने मुगलों की सहायता से आक्रमण कर दिया था। श्री गुरू गोविन्द सिह ने इस क्षेत्र की रक्षा के लिए गोरखा राजा घडवली ( 22 धारों के ) राजा के साथ युद्ध लड़ा। 13 दिनों तक चले इस युद्ध में गुरुगोविंद सिंह ने फतेह हासिल की।

इस दौरान गुरु गोविन्द जी को सूचना मिली की पांवटा साहिब में उनकी गर्भवति पत्नि ने पुत्र को जन्म दिया है। उस समय जीत के जश्न व् पहले पुत्र के जन्म खुशी को लेकर एक विशाल फतेह भंगाणी साहिब से पांवटा साहिब के लिए निकाला गया। यह इस परंपरा को स्थानीय सिख समुदाय ने आज तक जीवित रखा है।

हर वर्ष इसी उपलक्ष पर भगाणी साहिब से गुरुद्वारा पांवटा साहिब के लिए फतेह मार्च निकाला जाता है। आज सुबह भगाणी साहिब से फतेह मार्च निकाला गया जिसमे हजारों की संख्या में संगतें शामिल हुई। देर शाम को गुरुद्वारा पांवटा साहिब यह फतेह मार्च पहुंचा ।

नगर कीर्तन में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और साहिबजादा अजीत सिंह के जीवन से जुड़े झांकियों के अलावा भजन कीर्तन और युद्ध कला गतका का प्रदर्शन भी किया जाता है। अपनी तरह के अनोखे नगर कीर्तन में क्षेत्र के हजारों लोगों के साथ साथ पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली व जम्मू कश्मीर आदि से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं

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