हिमाचल में अब नई तकनीक से खेती, 30 मिनट में एक कनाल भूमि में रोपे जा सकते हैं वैजीटेबल पौधे 20 मिनट में एक किलो बीज की कतारबद्ध हो सकती है बुआई

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( धनेश गौतम )  अब हिमाचल प्रदेश में नई तकनीक से नगदी फसलों की खेती करना आसान हो गई हैं। प्रदेश में भी अब नई-नई तकनीकों से खेती करना शुरू हो गई है। प्रदेश जहां ऑर्गेनिक खेती की ओर लगातार बढ़ रहा है वहीं, नगदी फसलों से किसानों की आर्थिकी भी बढ़ रही है। मीडिया फॉर सैंटर स्टडी के माध्यम से ऐसी नई तकनीक खेती का खुलासा मीडिया के सामने हुआ है और पूरे प्रदेश में इस तरह की खेती को यदि किसान अपनाते हैं तो वे अपना काफी समय व मेहनत बचा सकते हैं।

 

जायका प्रोजेक्ट द्वारा हिमाचल के किसानों के लिए कई नई तकनीकें लाई हैं। खास बात यह है कि अब सब्जी के पौधों को रोपित करने के लिए किसान को झुकना नहीं पड़ेगा और न ही सब्जी के पौधे को रोपित करने के लिए गड्ढा बनाना पड़ेगा। इसके लिए जायका ने एक नई तकनीक की मशीन किसानों को उपलब्ध करवाई है और इस मशीन का नाम वैजीटेबल प्लांटर है।  मशीन में सब्जी के पौधे डालकर मशीन को जमीन में गाढ़ दिया जाएगा और मशीन का स्प्रिंग खींचने से पौधा रोपित हो जाएगा। इसके बाद न तो पौधे को दवाने की जरूरत है और न ही खड़ा करने की। इस मशीन से सब्जी का पौधा अपने आप भूमि की उस गहराई तक जाएगा जितनी जरूरत है और पौधे के चारों तरफ मिट्टी अपने आप ही भर जाएगी।

 

इस मशीन के माध्यम से 30 मिनट में एक कनाल भूमि में सब्जी रोपित की जा सकती है। जबकि पहले सब्जी रोपित करने के लिए किसानों को छोटे-छोटे गड्ढे बनाने पड़ते थे और उसके बाद झुककर ही सब्जी के पौधे रोपित करने पड़ते थे। इसके अलावा दूसरी तकनीक जायका ने किसानों को सीड प्लांटर की उपलब्ध करवाई है। वैजीटेबल प्लांटर की तरह ही सीड प्लांटर है और सीड प्लांटर के माध्यम से कतारबद्ध तरीके से किसान अपने खेतों में मात्र 20 मिनट में एक किलो बीज की बुआई कर सकता है। इसका फायदा यह है कि किसान को एक-एक बीज लाइनबद्ध हाथ से बुआई नहीं करनी पड़ेगी या फिर किसान पूरे खेत में पहले बीज फैंकता था और उसके बाद फिर से हल जोतता था। इससे कुछ बीज ज्यादा गहराई में जाते थे और कुछ कम गहराई में।

 

यही नहीं 25 से 30 फीसदी बीज खराब भी होता था लेकिन सीड प्लांटर से बीज का हर एक दाना बराबर गहराई में जाएगा और बराबर ही उगेगा और बीज खराब भी नहीं होगा। नीचले हिमाचल में किसान इस नई तकनीक को अपना रहे हैं और अपना समय व ज्यादा मेहनत बचा रहे हैं। इसके अलावा तीसरी नई तकनीक गड्ढा करने वाली मशीन भी जायका द्वारा किसानों को उपलब्ध करवाई गई है। किसानों को टमाटर, खीरा घिया, करेला जैसी वेलदार नगदी फसलों की बेलों को ऊंचाई तक ले जाने के लिए लकड़ के डंडों की स्पोट देनी पड़ती है। इसके लिए पहले किसानों को दिनभर गड्ढे खुदाई करने के लिए मेहनत करनी पड़ती थी।

 

लेकिन अब किसानों के लिए गड्ढा करने वाली मशीन उपलब्ध करवाई गई है जो एक घंटे में 200 से अधिक गड्ढे खोद सकती है। जायका के प्रोजेक्ट मैनेजर रविकांत चौहान के अनुसार कृषक विकास संघ के माध्यम से यह मशीनें किसानों को 20 से 50 रूपए के किराए तक उपलब्ध करवाई जा रही है। किसान स्वयं भी इन मशीनों को खरीद सकता है। वैजीटेबल प्लांटर की कीमत 2345 रूपए है और सीड प्लांटर की कीमत 3 हजार रूपए है। अब इस तरह की नई तकनीक से किसानों को खेती करने में आसानी हो रही है। किसानों का लेवर खर्चा भी बच रहा है और समय के बचत के साथ अधिक मेहनत भी नहीं करनी पड़ रही है।  किसानों को नई तकनीक की खेती के लिए वैजीटेबल व सीड प्लांटर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इससे किसानों को काफी लाभ मिल रहा है। समय के साथ मेहनत कम करनी पड़ रही है और लेवर खर्चा कम हो गया है :  श्वेता कृषि विशेषज्ञ जायका

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