लोहड़ी और गुरु गोविंद सिंह जयंती कल , एक ही दिन होने से इस बार रहेंगे बहुत खास

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(जसवीर सिंह हंस) लोहड़ी और गुरु गोविंद सिंह जयंती सिखों के प्रमुख त्योहार है। इस बार लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जाएगी वहीं इसी दिन गुरु गोविंद सिंह जयंती भी पड़ रही है। इन दोनों त्योहारों पर वीरता को नमन किया जाता है। गुरु गोविंद सिंह सीखों के दसवें गुरु थे। उन्होने खालसा पंथ की स्थापना की। उन्होने पंज प्यारे और 5 ककार शुरू किए थे। इसके साथ ही गुरू गोबिन्द सिंह ने सिखों की पवित्र ग्रन्थ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया तथा उन्हें गुरु रूप में सुशोभित किया।गुरु गोविंद सिंह जयंती पर गुरुद्वारों में विशेष साज-सज्जा की जाती है। इस दिन सुबह से ही गुरुद्वारों में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू होकर देर रात तक चलता है। इस दिन गुरुवाणी का पाठ, शबद कीर्तन किया जाता है।

 

खालसा पंथ के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। गुरु गोविंद सिंह जी को सिख धर्म का सबसे वीर योद्धा और गुरु माना जाता है। गुरुजी ने निर्बलों को अमृतपान करवा कर शस्त्रधारी कर उनमें वीर रस भरा। उन्होंने ही खालसा पंथ में ‘सिंह’ उपनाम लगाने की शुरुआत की। इस तरह उनकी वीरता को याद किया जाता है। साथ ही जिस तरह से उन्होंने अपने धर्म को आगे बढ़ाया और कुर्बानी दी वैसे ही आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया जाता है। वहीं लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी जैसे वीर को याद कर के गीत गाए जाते हैं।

लोहड़ी का त्यौहार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पोह  माह की आखिरी रात में मनाया जाता है। सिखों के लिए लोहड़ी खास मायने रखती है। त्यौहार के कुछ दिन पहले से ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है। विशेष रूप से शरद ऋतु के समापन पर इस त्यौहार को मनाने का प्रचलन है। 2019 में यह त्यौहार 13 जनवरी, रविवार को मनाया जाएगा। लोहड़ी के बाद से ही दिन बड़े होने लगते हैं, यानी माघ मास शुरू हो जाता है। यह त्योहार पूरे विश्व में मनाया जाता है। हालांकि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में ये त्योहार बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है।

त्यौहार के लिए बाजार में रोनक  सज गयी दुकाने

मूंगफली व गजक बेचने वालों की शहर में भरमार है तो स्टेट और नेशनल हाईवे पर भी खाद्य सामग्री की दुकानें सजी हुई हैं। शहर में  मूंगफली बेचने वाले अपना रोजगार जमाए हुए हैं। पांवटा साहिब के जामनी वाला रोड पर शिव मंदिर  के पास दुकानदार जावेद  ने कहा कि वह उत्तरप्रदेश से हर वर्ष यहां मूंगफली की रेहड़ी लगाता  है | इस बार लोहड़ी के त्यौहार के लिए खास तोर पर रेवड़ी व गजक बनवाई है व  पॉप कोर्न तेयार करने शुरू कर दिए है ताकि त्यौहार पर सामान कम न पड़े |

त्योहार की वजह से  बाजार में रेवड़ी, गजक, मूंगफली की डिमांड बढ़ गई है। कुछ दिन पहले जिन रेहड़ियों पर फल व सब्जी की बिक्री की जाती थी अब उन पर मूंगफली के ढ़ेर दिखाई देते हैं। सर्दी से बचने के लिए लोग गर्म खाद्य पदार्थो का अधिक सेवन करते हैं। जो लोग बदाम व काजू जैसे महंगी खाद्य सामग्री का सेवन नहीं कर सकते वह मूंगफली, रेवड़ी व पिंड खजूर की खरीदारी कर सर्दी से बचाव करते हैं।

शाम के समय रेहड़ियों पर मूंगफली व गजक की बिक्री बढ़ जाती है। मकर संक्रांति पर लोग मूंगफली, मक्की व रेवड़ी की अधिक खरीद करते हैं। बाजार में मूंगफली की 80 से 90 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक्री हो रही है। जबकि गजक व रेवड़ी सौ रुपये प्रतिकिलो तक बिक रही है। काजू 680 रुपये व बादाम 720 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रहा है। किसमिस के दाम 300 रुपये व छुआरे 150 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है।

सिरमौर जिला के कई क्षेत्रों में लोहडी की रात को अलाव जलाकर तिल एवं रेवडियो के साथ अग्नि पूजा करने का विधान है। लोग अग्निदेव की पूजा के साथ-साथ रात्री को नाच-गाकर लोहडी को मनाते है। शास्त्रों के अनुसार मकर सक्रांति के दिन सूर्य भगवान की गति उतरायण की तरफ  हो जाती है और दिन बढ़ने लगते है और रातें छोटी होने लग जातीहै।  पारंपरिक त्यौहार जहां लोगो में आपसी प्यार एवं सद्भावना का संदेश देते है वहीं पर इनके आयोजन से लोगो में पारस्परिक मेलजोल के साथ-साथ राष्ट्र की एकता और अखण्डता को भी बल मिलता है।

लोहड़ी कैसे मनाते हैं जानिए परंपरा 

 

  • लोहड़ी पर घर-घर जाकर दुल्ला भट्टी के और अन्य तरह के गीत गाने की परंपरा है, लेकिन आजकल ऐसा कम ही होता है।
  • बच्चे घर-घर लोहड़ी लेने जाते हैं और उन्हें खाली हाथ नहीं लौटाया जाता है। इसलिए उन्हेंगुड़, मूंगफली, तिल, गजक या रेवड़ी दी जाती है।
  • दिनभर घर-घर से लकड़ियां लेकर इकट्ठा की जाती है। आजकल लकड़ी की जगह पैसे भी दिए जाने लगे हैं जिनसे लकड़ियां खरीदकर लाई जाती है और शामको चाैराहे या घरों के आसपास खुली जगह पर जलाई जाती हैं।
  • उस अग्नि मेंतिल, गुड़ और मक्का को भोग के रूप में चढ़ाया जाता है।
  • आग जलाकर लोहड़ी को सभी में वितरित किया जाता है। नृत्य-संगीत का दौर भी चलता है।पुरुष भांगड़ा तो महिलाएं गिद्दा नृत्य करती हैं।

 

लोहड़ी की कथाएं

 

  • दुल्ला भट्टी की कहानी

मुगल राजा अकबर के काल में दुल्ला भट्टी नामक एक लुटेरा पंजाब में रहता था जो न केवल धनी लोगों को लूटता था, बल्कि बाजार में बेची जाने वाली ग़रीब लड़कियों को बचाने के साथ ही उनकी शादी भी करवाता था। लोहड़ी के त्यौहार को दूल्ला भट्टी से जोड़ा जाता है। लोहड़ी के कई गीतों में भी इनके नाम का ज़िक्र होता है।

 

  • कृष्ण ने क‍िया था लोहिता का वध

एक अन्य कथा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन कंस ने श्री कृष्ण को मारने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल भेजा था, जिसे श्री कृष्ण ने खेल-खेल में ही मार डाला था। उसी घटना के फलस्वरूप लोहड़ी पर्व मनाया जाता है।

 

 

  • भगवान श‍ंकर और सती
    एक अन्य पौराणिक कथा के मुताबिक राजा दक्ष की पुत्री सती ने अपने पति भगवान शंकर के अपमान से दुखी होकर खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था। इसकी याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है।

 

  • लोहड़ी का महत्व

 

पंजाबियों के लिए लोहड़ी उत्सव खास महत्व रखता है। जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चे का जन्म हुआ हो, उन्हें विशेष तौर पर लोहड़ी की बधाई दी जाती है। घर में नव वधू या बच्चे की पहली लोहड़ी का काफी महत्व होता है। इस दिन विवाहित बहन और बेटियों को घर बुलाया जाता है। ये त्योहार बहन और बेटियों की रक्षा और सम्मान के लिए मनाया जाता है।

 

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